माँ से दूर होने का दर्द

   जब किसी कारण वास्  एक माँ अपने बेटे का घर छोर कही दूर चली जाती है ।  और 2 साल बीत गए ,आज उसके बेटे की जिंदगी में सब गलत हो रहा है ।  तब  उसे अपनी माँ  की याद आ रही है और उसे अपनी गलती पर  पछतावा हो रहा है ।  तब उसके दिल से आवाज आ रहे है। उसे मै आपके सामने रखने जा रहा हु  । 

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तेरी चाहतेा में कितना तडपे है  । 

सावन भी तुम बिन कितने बरसे है  । 

जहा भी जाऊ 

तुझे ही पाउ,

तेरे बिना मै जी न पाउँगा 

रोते  रोते यु मर जाऊंगा ,

खुद में ही मै कही खो जाऊंगा ,

तेरे लिए ही सिर्फ मै गाऊंगा ,

तेरे बिना अब न रह पाऊँगा ,

हां माँ,

 तुहि तो है मेरी  सांसो की आस में 

जिंदगी भर मै रहु तेरे ही पास में  

मालूम न मै खुद में ही खो गया 

जिन्दा होते हुए भी मौत के बहो में सो  गया  

तेरे बिना जीना 

जहर का घुट पीना 

बस यही पाउ 

तेरे  खाबो में आजाऊ 

तुहि तो  मेरी माँ  है 

तेरी बहो में सारा जहॉ  है 

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AUTHOR-AMRIT KUMAR FROM MAIRWA

गाँव की खुशबू

गाँव छोड़ शहर चले हम ,

सोचा था नामी कहलायेंगे हम ,

वहाँ जा कर पता चला ,

शहर है बहुत बड़ी बला ,

अब पता चला मुझे ,

कई बात सुझे ,

जहाँ माँ ने अपने हाथो से खिलाया था ,

पिता ने प्यास लगने पर पानी पिलाया था ,

ऐसी यादो  को भूल आया मै, 

शहर में कैसे घुल आया मैं ,

गाँव जैसी मिट्टी की खुशबू यहाँ  नहीं मिलती है ,

यहाँ बिना गमले गुलाब नहीं खिलती है ,

वहाँ के बगीचों में खेलना ,

खेतो की  कड़ी मेहनत को झेलना ,

यहाँ वो आनंद न मिलेगा ,

गांव में तो पत्थर पर भी फूल खिलेगा ,

गाँव में तो बिना मांगे दूध दही मिल जाता है ,

शहर में तो मांगने पर भी साफ पानी नहीं मिलता ,

गांव वाले तो बेशबर प्यार करते  है ,

 शहर वाले तो अपने फैशन के लिए कोयल का भी शिकार करते है ,

यहाँ न रह पाउँगा ,

गंदगी से मर गाऊंगा ,

मुझे वापस अपने गाँव जाना है,

वहाँ के लोगो का प्यार पाना है ,

माँ के हाथो का खाना खाना है ,

गांव में अपनों के साथ सारा जीवन बिताना है। . . . . . . . . . . . . . . . . .  

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AUTHOR-AMRIT KUMAR FROM MAIRWA

बिजली में बदलाव

पांच साल पहले 

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बिजली आओ न

 हमे ठंडक दिलाओ न 

दो दिन हो गए तुम्हे देखे बिना 

बहुत मुश्किल है तुम्हारे बिना जीना 

बच्चे अब पढ़ाई से आस खो रहे है

 आमिर भी बैठ अब रो रहे है 

किसान बिना पानी बीज बो रहे है 

लोगो की शिकायत नेता भी बैठ पसीना पोछ रहे है 

इस समय

 बिजली अब आती है

 हमें ठंडक दिलाती है 

हमारे संग बहुत समय तुम बिताती हो

 सबका आशिर्बाद तुम पाति हो 

बच्चे अच्छे अंक से अब पास हो रहे है

 गरीब भी चैन से सो रहे है

 किसान अच्छे बीज बो रहे है

नेता भी इसी के गीत गा रहे है 

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AUTHOR-AMRIT KUMAR FROM MAIRWA

तू कहेगीतो

हे क्या ऊपर क्या निचे 

 तेरे आगे तेरे पीछे 

बीताता मै तेरी सोच में राते 

बताता मै अपने दिल की सारी बाते 

रुक जा इतनी जल्दी कहा जाने की 

मेरी चह है तुझे ही पाने की 

अपने कदमो को तू रोक

मेरे दिल को न ठोक 

मुझे पता है तुझे पता है 

तू मुझसे प्यार करती है 

फिर क्यों तू डरती है 

अंकल  से तू बोलेगी की मै बोलू 

इस पोल को तू खोलेगी की मै खोलू 

     अच्छा चल अभी नहीं बाद में 

हाथो में हाथ डाल चल मेरे साथ में 

(————-TUNING————–)

तू जो कहे गई वही करूँगा। 

तेरे लिए पुरे दुनिया से लडूंगा। 

दिल्ली घूमने बोले दुबई गुमाऊँगा 

तू चाहे बोले अपने  बहो में झमाउँगा  

कॉफी मांगेगी तो दारू दिलाऊंगा 

तेरे  लिए मै मोची बनजाऊंगा।

तू बनने बोले धोबी बनजाऊंगा 

तुझको पटाने में  सलमान बन जाऊंगा 

(————TUNING———)

लगता है तू कल  रात सोइ नहीं है 

मेरे यादो में खोई रही है 

अब तुझे छोड़कर कही न जाऊंगा 

तू जहा बोलेगी वहा बंगला बनवाऊंगा 

चलो अब साम होने आइ । 

तुझेसे शादी के बाद दूर होगी मेरी तन्हाई।  

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          BY-AMRIT KUMAR FROM MAIRWA 

भारतीय कवि की आवाज

मैं भारत का नौजवान कवि हु 

बदलते भारत का बदलता छबि हु 

भारत से ही लिखना सीखा हु 

आज तक भारत के लिए ही लिखा हु 

मेरी कलम कभी न रुकेगी 

सच लिखने में कभी न चुकेगी 

भारत एक ऐशा देश है 

जहॉ दीखता सभी प्रकार का भेष है 

जिसने भी भंग किया है भारत के शान्ति को 

उसने हाथ लगाया है हाथ अंदर बैठे क्रांति को 

हमने यहाँ जन्म  लिया यह एक कर्ज है 

भारत माता पर हमला करने वालो से बदला लेना हमारा फर्ज है  

 एक कवि किसी भी आर्मी से कम नहीं होता है। एक कवि या लेखक अकेले पुरे देश में जगा देता है। आज हम आजाद है उनमे भी 99% कवियों ओर लेखकों का हाथ है। 

             मै कोई कवी नहीं हु पर हमेशा BLOG पर कवितायें लिखता रहता हु। 

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AUTHOR-AMRIT KUMAR FROM MAIRWA

प्रलय का संकेत

बढ़ता तापमान प्रलय का संकेत है,

भगवान से मिला प्रकृति एक  भेट है 

हे मनुष्य बहुत सतालिया इस प्रकृती को 

अब ये बिगाड़ेगी तुम्हारे आकृती को 

 प्रकृति की महत्व को तुमने न जाना है  

 भगवान का काम तुम्हे ये सीखना है 

जिसने तुम्हे जन्म दिया उसी को तुमने तड़पाया है

 प्रकृति का यह कर्ज तुमने नहीं चुकया है 

अभी भी समय है

 उनपर हो रहे अत्याचार को तुम मिटाओ 

उन कर्जो को अभी चुकाओ 

एक कवी होते हुए ये मेरा फर्ज है की अपने  प्रकृति के लिए लोगो में उमंग जगाउ। आशा करता हु की मेरी कविता आपके दिल में लगी होगी। 


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